श्रीसूक्तम् साधना के नियम

श्रीसूक्तम् साधना के नियम

श्रीसूक्तम् एक परिवर्तनकारी साधना है। ओम स्वामी जी के मार्गदर्शन में इस साधना को करने के अद्भुत अवसर का लाभ अवश्य लें। यह 17 दिवसीय साधना 20 अक्टूबर 2025 (दिवाली की रात्रि) से आरंभ होकर 5 नवम्बर 2025 तक चलेगी। 


साधना के नियम

  •  नौ वर्ष की आयु से ऊपर किसी भी लिंग, धर्म, योग्यता, या पृष्ठभूमि का व्यक्ति इस साधना को दीक्षा सहित या रहित कर सकता है।
  • यह साधना उन लोगों के लिए भी है जो दीक्षित नहीं हैं, या किसी अन्य आध्यात्मिक गुरु/मार्गदर्शन का अनुसरण करते हैं।
  • महिलाएं मासिक धर्म के समय भी इस साधना को कर सकती हैं/जारी रख सकती हैं।
  • साधना के अंतराल में पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।
  • यदि आपकी नौकरी के कारण आपको यात्राएं करनी पड़ती हैं, तो भी आप इस साधना का अभ्यास कर सकते हैं, बशर्ते कि आप सोलह दिनों के लिए अपनी सुबह और संध्या की दिनचर्या का पालन कर सकें।
  •  साधना के अंतराल में, केवल शाकाहारी भोजन (प्याज और लहसुन के बिना) का ही सेवन करें। मांसाहार, अंडे और समुद्री भोजन सख्त वर्जित हैं। डेयरी उत्पादों का सेवन कर सकते हैं, लेकिन बेकरी उत्पाद और पशु-तत्वयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। 
  •  आप साधना के अंतराल में अपनी आवश्यक दवाइयाँ ले सकते हैं, भले ही उनमें पशु-संबंधित तत्व हों। सुनिश्चित करें कि आप आध्यात्मिक अभ्यास के साथ-साथ अपने चिकित्सा उपचार का भी पालन करें। 
  • जप और यज्ञ से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आदर्श रूप से, लाल वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन आप किसी भी रंग के वस्त्र पहन सकते हैं।
  • जप के लिए आसन पर सुखासन या पद्मासन में बैठें।
  • आप कम से कम एक माला (108 बार) और अधिकतम 10 माला का जप कर सकते हैं।
  • आसन को एक लाल कपड़े से ढकें। सबसे उपयुक्त यह होगा कि आप एक कंबल से बने आसन का उपयोग करें।
  • यज्ञ करते समय उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर मुख करना उचित है।
  • यदि आप किसी दिन साधना नहीं कर पाते हैं, तो श्रीसूक्तम् साधना खंडित हो जाएगी। फिर आपको इस साधना को करने के लिए एक वर्ष की प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। 
  •  यज्ञ श्रीसूक्तम् साधना का एक महत्वपूर्ण अंग है। यद्यपि, यदि आप इसे नहीं कर सकते, तो सुबह के समय पिछली संध्या के मंत्र का 216 बार जप करें। यह आदर्श नहीं है, लेकिन यज्ञ करने में असमर्थता को सम्पूर्ण साधना छोड़ने का कारण न बनाएं। यदि आप यज्ञ केवल एक बार कर सकते हैं, तो साधना के अंतिम दिन (5 नवम्बर) इसे अवश्य करें।
  • हर सुबह एक छोटी सी दान राशि (दक्षिणा) अलग रख दें और साधना के अंत में, 17 दिन की साधना के बाद, इसे किसी चैरिटेबल उद्देश्य या देवी मंदिर में दान करें। 

इस साधना से संबंधित प्रश्नों के लिए, कृपया FAQ ब्लॉग पोस्ट पढ़ें या हमें इस ईमेल पते पर संपर्क करें: serve@sadhana.app

Thanks For Reading
If this blog added value to your spiritual journey, please share it with your loved ones. Feel free to leave a comment or tell us what spiritual topics you would like us to write about next.
Back to blog

Leave a comment

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts.

We are proud Sanatanis, and spreading Sanatan values and teachings, our core mission. Our aim is to bring the rich knowledge and beauty of Sanatan Dharm to every household. We are committed to presenting Vedic scriptural knowledge and practices in a simple, accessible, and engaging manner so that people can benefit and internalize them in their lives.

Presented By Team Sadhana
श्री सूक्तम् साधना करें

श्री सूक्तम् साधना करें

ओम स्वामी द्वारा मार्गदर्शन
तिथि: 20 अक्टूबर – 5 नवम्बर '25

Download Now →

इस दीपावली, प्राप्त करें माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद।

श्री सूक्तम् प्रसाद प्राप्त करें!

इस बॉक्स में आपको मिलेगा:

  • गुड़ मोदक
  • श्री गणेश और माँ लक्ष्मी की चाँदी-प्लेटेड सिक्का
  • 10 ग्राम कुमकुम

नोट: सीमित प्रसाद बॉक्स उपलब्ध हैं।

Book Now!

सिद्धों का प्रामाणिक ज्ञान

अब हिमालयी सिद्ध ओम स्वामी के द्वारा आपके लिए सुलभ किया गया