श्री रुद्रम् क्या है?

श्री रुद्रम् क्या है?

इस ब्लॉग पोस्ट में आप वेदों के एक अत्यंत पूजनीय स्तोत्र श्री रुद्रम् के बारे में जानेंगे।

'नमः शिवाय'—इस मंत्र से वे लोग भी भलीभांति परिचित हैं जो मंत्र साधना सीखने के प्रारंभिक चरण में है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव का यह शक्तिशाली पंचाक्षरी मंत्र 'श्री रुद्रम्’‘ नामक एक वैदिक स्तोत्र से लिया गया है?  देशभर के कई घरों और शिवालयों में दैनिक प्रार्थना श्री रुद्रम् के मंत्रोच्चारण से की जाती हैं। इस जप को करने से नकारात्मकता समाप्त होती है। साथ ही, यह जीवन में कल्याण और समृद्धि के लिए भगवान शिव की उपस्थिति का आवाहन करता है।

एक प्राचीन वैदिक स्तुति
श्री रुद्रम् जिसे शतरुद्रीय या श्री रुद्रप्रश्नः भी कहा जाता है, सर्वव्यापी ब्रह्म (श्री रुद्र-शिव) को समर्पित एक स्तोत्र है। यह स्तोत्र भगवान शिव के उस रौद्र स्वरूप (रुद्र) की स्तुति करता है, जिसे वे ब्रह्मांड के प्रलय के समय धारण करते हैं। श्री रुद्रम् का उल्लेख कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में मिलता है। इसके दो भाग हैं: नमकम और चमकम। आइए, इनके बारे में विस्तार से जानें।

नमकम  
यह तैत्तिरीय संहिता के चतुर्थ कांड, पंचम प्रश्न में ग्यारह अनुवाकों से मिलकर नमकम बनता है। नमकम का प्रथम अनुवाक भगवान रुद्र से उनकी कृपा के लिए की गई प्रार्थना है। द्वितीय से नवम अनुवाक तक उन्हें विभिन्न स्वरूपों में नमन किया जाता है।

  • सर्वात्मा (सम्पूर्ण जगत के समस्त रूपों में व्याप्त)
  • सर्वांतर्यामी (सब कुछ नियंत्रित करने वाली आंतरिक व्यवस्था के रूप में)
  • सर्वेश्वर (सभी के स्वामी)

दसवें अनुवाक में प्रार्थनाएँ सम्मिलित हैं, जबकि ग्यारहवें अनुवाक में श्री रुद्र की स्तुति विभिन्न देवताओं के रूप में की जाती है, जो विभिन्न लोकों के पालनहार हैं। नमकम के पहले नौ अनुवाकों में 'नमः' शब्द की लगभग 300 बार पुनरावृत्ति हुई है। इसी कारण इस भाग को 'नमकम' कहा जाता है।

चमकम
यह श्री रुद्रम् का दूसरा भाग है, जो यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में नमकम के पश्चात आता है। चमकम का पाठ भी नमकम जप के बाद किया जाता है। यह चतुर्थ कांड के सप्तम प्रश्न में 11 अनुवाकों के रूप में वर्णित है।  
चमकम में प्रत्येक श्लोक के अंत में ‘च मे’ (जिसका अर्थ है "मेरे साथ" या "मुझे मिले") शब्द आते हैं । इसी कारण इसे चमकम कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में,  भक्त विभिन्न भौतिक और आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान रुद्र से प्रार्थना करता है। विशेष बात यह है कि चमकम में कुल 300 आशीर्वादों या वरदानों का उल्लेख  हैं जो की श्री रुद्रम् का जप या श्रवण करने से भक्त को प्राप्त होते हैं।

अधिक पढ़ें: श्री रुद्रम का क्या महत्व है?

विभिन्न रूद्रम पाठ 
श्री रुद्रम् का जप नमकम और चमकम के विभिन्न संख्या संयोजनों के साथ किया जाता है।


ईश्वर गीता (कूर्म पुराण से लिया गया एक प्राचीन हिंदू दार्शनिक ग्रंथ) में, श्री रुद्रम् को एक उपनिषद माना गया है, जो जीव (व्यक्ति), जगत (संसार) और ईश्वर (परमात्मा) के सत्य को उजागर करता है। भगवान के नाम उपनिषदों के रूप में कार्य करते हैं, जो भक्तों को परम (गहन) ज्ञान प्रदान करते हैं।

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Comments (4)

Krishna om Sharma February 21, 2026

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Jai shankar tripathi February 21, 2026

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Poonam Sadani February 28, 2025

Thanks a lot for this insightful deep knowledge on SHRI RUDRAM.Pranam

Meenu February 28, 2025

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