श्री बद्रिका आश्रम में होने वाला रुद्राभिषेक क्यों विशेष है?
इस लेख में हम आपको श्री बद्रिका आश्रम में होने वाले विशेष रूद्राभिषेक के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।
शिवाय विष्णुरूपाय विष्णवे शिवरूपिणे ।
यथान्तरं न पश्यमि तेन तौ दिशतः शिवम् ॥
— महाभारत, हरिवंश पर्व 2.125.29
(भावार्थः भगवान शिव विष्णु के रूप में और भगवान विष्णु शिव के रूप में हैं। दोनों में कोई भेद नहीं है, और दोनों ही शुभता प्रदान करते हैं।)
भगवान शिव और भगवान विष्णु एक ही परम ब्रह्मा (परम सत्ता) के दो भिन्न-भिन्न पहलू हैं। बस, उन्हें अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री बद्रिका आश्रम में भगवान शिव और श्री विष्णु के इस संयुक्त स्वरूप की पूजा की जाती है।
शास्त्रों में कई बार यह उल्लेख मिलता है कि भगवान विष्णु और भगवान शिव एक-दूसरे के सबसे बड़े भक्त हैं। अनेक स्थानों पर, वे एक ही रूप में पहचाने और पूजे जाते हैं। उदाहरण के लिए, भगवान शिव स्वयं माँ पार्वती से कहते हैं:
श्री राम राम रामेति, रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने॥
(भावार्थः राम नाम, (सहस्रनाम में वर्णित) भगवान विष्णु के हजार नामों के समान ही महान है। प्रभु श्री राम नाम का ध्यान करने से मेरा मन भगवान राम की दिव्य चेतना में लीन हो जाता है, जो पारलौकिक है।)
विष्णु सहस्रनाम—भगवान शिव का दिव्य उपहार
वास्तव में, विष्णु सहस्रनाम भगवान शिव के बिना अस्तित्व में नहीं आता। महाभारत में उल्लेख है कि विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् का ज्ञान पांडवों को उनके पितामह भीष्म ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में दिया था। पितामह भीष्म बाणों की शय्या पर लेटे हुए मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे थे। वे निरंतर भगवान श्री कृष्ण का ध्यान कर रहे थे।
इसी समय, श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा की वे भीष्म पितामह से दीक्षा लें। युधिष्ठिर ने पितामह से संसार के सर्वोच्च भगवान के बारे में ज्ञान प्रदान करने के लिए विनती की। भीष्म पितामह बोले कि सर्वश्रेष्ठ, सबसे शुभ, देवताओं के प्रमुख और सभी प्राणियों के पिता वही हैं जो परम हैं—श्री विष्णु।
इसके बाद, भीष्म पितामाह ने श्री विष्णु के 1008 दिव्य नामों का गुणगान करते हुए विष्णु सहस्रनाम के मंत्रो का उच्चारण किया। भीष्म पितामाह के मुख से इन दिव्य नामों के श्रवण में तल्लीन पांडव स्तोत्रम् को लिख या याद नहीं कर सके। जब युधिष्ठिर ने बाद में अपने भाइयों से पूछा, तो किसी को भी स्तोत्रम् याद नहीं था। चिंतित होकर, पांडवों ने समाधान के लिए श्रीकृष्ण की ओर देखा।
श्रीकृष्ण ने बताया कि पूरे ब्रह्मांड में केवल एक ही दिव्य शक्ति हैं जो पांडवों को विष्णु सहस्रनाम का स्मरण करने और दोहराने की शक्ति दे सकते हैं— देवादिदेव महादेव। बिना समय गंवाए, सहदेव (पांडवों में सबसे छोटे भाई) ने अपनी स्फटिक माला (जप माला) लेकर भगवान शिव की प्रार्थना शुरू कर दी। महादेव की कृपा से सहदेव धीरे-धीरे पूरे सहस्रनाम को वैसा ही दोहरा सके जैसा पितामह भीष्म ने सुनाया था।
‘शिव’ विष्णु सहस्रनाम में 27वां नाम है। यह उल्लेख चतुर्थ श्लोक में किया गया है। श्री आदि शंकराचार्य ने अपने भाष्य में भगवान विष्णु और शिव की एकरूपता (अभेद) को स्पष्ट किया है।
दो महासागरों का अद्भुत मिलन
भगवान शिव और श्री विष्णु के संयुक्त रूप को ‘हरिहर’ कहा जाता है, जिसमें ‘हरि’ का अर्थ श्री विष्णु और ‘हर’ का अर्थ भगवान शिव होता है। इस रूप को महाशास्ता और शंकरनारायण के नाम से भी जाना जाता है। ब्रह्माण्ड पुराण में इससे जुड़ी एक बहुत रोचक कथा वर्णित है।
समुद्र मंथन के दौरान, जब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए, तो असुरों ने उसे छीन लिया। देवताओं की सहायता के लिए, भगवान विष्णु ने माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी का ध्यान किया। देवी के साथ पूर्ण तादात्म्य स्थापित करते हुए, भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया, जो उनका मोहक एवं अति आकर्षक दिव्य स्वरूप था। अपनी चतुराई और आकर्षण से, मोहिनी ने अमृत केवल देवताओं में बाँट दिया। (इसमें राहु एकमात्र अपवाद था।)
बाद में, नारद मुनि ने भगवान शिव को भगवान विष्णु के इस मोहक अवतार के बारे में बताया। भगवान शिव को विश्वास नहीं हुआ कि वे अपने इष्ट के इस अवतार से अनभिज्ञ हैं।भगवान शिव ने मोहिनी अवतार को स्वयं देखने की इच्छा प्रकट की। भगवान विष्णु ने बार-बार मना किया, परंतु भगवान शिव अपने निर्णय पर अडिग रहे।
अंततः भगवान विष्णु ने अनुमति दे दी। उन्होंने कहा, "लेकिन यह स्मरण रखना कि मैंने आपको पहले ही चेतावनी दी थी।" अगले ही क्षण, भगवान विष्णु अदृश्य हो गए, और उनके स्थान पर मोहिनी प्रकट हो गईं।
भगवान शिव मोहिनी के मोहजाल में फँस गए। उनकी भावनाएँ उन्हें विचलित कर गईं, और वे मोहिनी के पीछे भागने लगे। आखिरकार, मोहिनी वास्तव में श्री विष्णु द्वारा धारण किया गया श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी का ही दिव्य स्वरूप था। इसी कारणवश भगवान शिव उनसे अत्यंत आकर्षित हो गए। मोहिनी और भगवान शिव के इस दिव्य मिलन से भगवान हरिहर का आविर्भाव हुआ।
श्री बद्रिका आश्रम में दुर्लभ रुद्राभिषेक का अनुष्ठान
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर, श्री बद्रिका आश्रम में भगवान विष्णु और भगवान शिव का दिव्य हरिहर स्वरूप जीवंत हो उठता है। इस दिन ओम स्वामी जी द्वारा उनका रुद्राभिषेक किया जाता है। श्री हरि (भगवान विष्णु) के विग्रह पर पंचामृत, हल्दी, सिंदूर और विभूति (पवित्र भस्म) के साथ पारंपरिक अभिषेक किए जाने पर, धीरे-धीरे हरिहर स्वरूप उभरने लगता है। यह अद्भुत दृश्य देखने योग्य होता है। जब अभिषेक के हर अर्पण के साथ श्री हरि का मुस्कुराता हुआ चेहरा धीरे-धीरे महायोगी शिव के स्वरूप में परिवर्तित हो जाता है।
श्री हरि का मुकुट भस्म से लिपटे रुद्राक्षों वाली जटाओं में बदल जाता है। भक्तगण भगवान महादेव के भव्य स्वरूप को भस्म के साथ (बाईं ओर) एवं भगवान महाविष्णु के पीताम्बर अंग को (दाईं ओर) दर्शन सकते हैं।
रुद्राभिषेक के इस अद्भुत अनुष्ठान में यह अनुभूति होती है कि भगवान के दोनों स्वरूपों में कोई अंतर नहीं है। अपनी अल्प बुद्धि के कारण, हमने ये भेद और भगवान के बारे में एक सीमित अवधारणा निर्मित की है।
"एकं सत् विप्राः बहुधा वदन्ति" अर्थात् सत्य एक है, लेकिन बुद्धिमान लोग इसे विभिन्न नामों से पुकारते हैं या भिन्न रूपों में देखते हैं। यह विचार सनातन धर्म की नींव है।
हमारे साथ इस पावन अवसर में सम्मिलित हों!
आइए, महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर, श्री बद्रिका आश्रम में होने वाले इस रूद्राभिषेक के दौरान, भगवान के दिव्य हरिहर स्वरूप के साक्षी बनें और उनकी पूजा करें। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण साधना ऐप पर 15 फरवरी, 2026 को शाम 6.00 बजे (IST) किया जाएगा।
सबसे विशेष बात यह है कि आप ऐप पर ठीक वैसे ही रूद्राभिषेक कर पाएँगे जैसे स्वामी जी आश्रम में करेंगे। इस अद्भुत अवसर का लाभ अवश्य उठाएँ। श्री हरि और भगवान शिव के आशीर्वाद को जीवन में आमंत्रित करें।
We are proud Sanatanis, and spreading Sanatan values and teachings, our core mission. Our aim is to bring the rich knowledge and beauty of Sanatan Dharm to every household. We are committed to presenting Vedic scriptural knowledge and practices in a simple, accessible, and engaging manner so that people can benefit and internalize them in their lives.
Presented By Team Sadhana
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