श्री हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र साधना क्या है और इसके लाभ?

श्री हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र साधना क्या है और इसके लाभ?

 

जेहि सरीर रति राम सों सोइ आदरहिं सुजान।
रुद्र देह तजि नेहबस बानर भे हनुमान।।
                                                  (तुलसीदास जी कृत दोहावली १४२)

अर्थात् सज्जन उसी शरीर का आदर करते हैं जिसको श्रीराम से प्रेम हो। इसी स्नेहवश रुद्रदेह त्यागकर भगवान शिव ने हनुमान जी के रूप में वानर शरीर धारण किया।

श्री हनुमान को रुद्रावतार, रुद्रांश, अथवा रुद्रांशसम्भूता ( रुद्र+अंश+संभूत अर्थात् शिव के अंश से उत्पन्न) कहा जाता है। श्री रुद्र, भगवान शिव का उग्र किंतु अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप हैं। उनके इस स्वरूप का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। श्री रुद्र का संबंध गर्जना करते तूफानों और प्रचंड आंधियों से है। वे उस भयानक किंतु शुद्ध करने वाली शक्ति के प्रतीक हैं, जो नकारात्मकता का नाश कर दुःख को दूर करती है।

श्री हनुमान को भगवान रुद्र का ग्यारहवाँ अथवा अंतिम स्वरूप माना जाता है, जो उनके उग्र स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है। वेदों में श्री रुद्र को ‘मरुतों के पिता’ (तूफान के देवताओं का एक समूह) के रूप में वर्णित किया गया है, जिनका वायुदेव से निकट संबंध है। रोचक बात यह है कि श्री हनुमान का एक नाम ‘मारुति’ भी है, जिसका अर्थ है वायुदेव और रुद्र के पुत्र।

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा (16वीं शताब्दी) में हनुमान जी के रुद्र स्वरूप का उल्लेख मिलता है। इसकी छठी चौपाई में उन्हें “शंकर सुवन, केसरी नंदन” कहा गया है, जिसका अर्थ है भगवान शंकर के अंश तथा वानरराज केसरी के पुत्र

इसी प्रकार, शिव पुराण के शतरुद्र संहिता (अध्याय 20, खंड 3) में नंदीश्वर यह वर्णन करते हैं कि किन परिस्थितियों में महेश्वर शिव ने श्री राम के कार्य में सहायता करने के लिए श्री हनुमान के रूप में अवतार लिया। श्री रुद्र और हनुमान के मध्य यह गहन संबंध ही हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र का आधार है।

इस ब्लॉग में हम श्री हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र क्या है, इसकी समृद्ध परंपरा का आरंभ कैसे हुआ, तथा इस मंत्र की साधना के क्या लाभ हैं—इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

प्रमुख बातें:

  1. श्री हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र क्या है?
  2. हनुमान द्वादशाक्षर मंत्र की दीक्षा सर्वप्रथम किसे दी गई थी?
  3. हनुमान द्वादशाक्षर मंत्र साधना के लाभ


श्री हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र क्या है?

(श्री हनुमान लंका पहुँचने के लिए समुद्र पार करने हेतु प्रस्थान करते हुए।)

हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र भगवान हनुमान को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र है। “द्वादशाक्षरी” शब्द “द्वादश” (बारह) और “अक्षर” (वर्ण) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है बारह अक्षरों वाला मंत्र।

श्री रुद्र से संबंध

श्री हनुमान को प्रायः एक भक्त के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन द्वादशाक्षरी मंत्र उनके उग्र और परिवर्तनकारी श्री रुद्र स्वरूप का आवाहन करता है।  इसलिए इस मंत्र को  “हनुमान रुद्र मंत्र” के नाम से भी जाना जाता है। इस मंत्र का प्रमुख स्रोत रुद्रयामल तंत्र माना जाता है। मंत्र में उल्लिखित "रुद्रात्मकाय" शब्द स्पष्ट रूप से हनुमान जी के शिव (रुद्र) के अवतार होने की ओर संकेत करता है। शिव पुराण और स्कन्द पुराण जैसे ग्रंथ हनुमान जी को भगवान रुद्र का अवतार मानते हैं।

यो वै चैकादशो रुद्रो हनुमान सः महाकविः।
अवतीर्णः सहायतार्थ विष्णोरमित तेजसः।।
                                              —स्कंदपुराण

भावार्थ-  "जो वास्तव में ग्यारहवें रुद्र (शिवजी के ग्यारहवें अवतार) हैं, वे महाकवि हनुमान हैं। वे असीम तेज वाले भगवान विष्णु (श्री राम) की सहायता के लिए अवतरित हुए हैं"।

यद्यपि वाल्मिकी रामायण में द्वादशाक्षरी मंत्र का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं मिलता, फिर भी यह ग्रंथ भगवान हनुमान के उन मूल गुणों को स्थापित करता है, जिनका आवाहन यह मंत्र करता है।

सुंदरकांड में हनुमान जी को निर्भयता, बुद्धि, बल और भक्ति के साकार रूप में चित्रित किया गया है। ये सभी गुण रुद्र से संबंधित माने जाते हैं। महर्षि वाल्मीकि श्री हनुमान को अग्नि के समान तेजस्वी, अजेय, ब्रह्मांड में विचरण करने में समर्थ तथा सृजन और संहार दोनों की क्षमता से संपन्न बताते हैं।

सूर्यदेव से संबंध

बारह अक्षरों वाला द्वादशाक्षरी मंत्र 12 आदित्यों से भी जुड़ा हुआ है, जो सूर्यदेव के विभिन्न स्वरूप माने जाते हैं। श्री हनुमान में सूर्य नारायण का ‘तेज’ विद्यमान है। बाल्यकाल में उन्होंने सूर्यदेव को एक चमकीला फल समझकर निगलने का प्रयास किया था।बाद में सूर्यदेव उनके गुरु बने और उन्होंने उन्हें वेदों, शास्त्रों तथा नौ (नव) व्याकरण का ज्ञान प्रदान किया।


(श्री हनुमान अपने गुरु सूर्यदेव से ज्ञान प्राप्त करते हुए।)

वायुदेव के पुत्र होने के कारण श्री हनुमान ‘मुख्य प्राण’ भी माने जाते हैं, जो जीवन की मूल प्राणशक्ति का संचालन करते हैं। वे ब्रह्मांडीय श्वास का प्रतिनिधित्व करते हैं। द्वादशाक्षरी मंत्र के एक बीज मंत्र के माध्यम से श्री हनुमान की इस प्राणशक्ति का आवाहन सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु किया जाता है।

श्री हनुमान: दो परंपराओं के मध्य एक सेतु


(श्री विष्णु और महादेव के गुणों से युक्त श्री हनुमान—अनंतमंगलम अंजनेय मंदिर, तमिलनाडु।)

श्री हनुमान शैव और वैष्णव परंपराओं के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे भगवान राम के परम भक्त हैं, जो श्री विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। श्री हनुमान के कुछ स्वरूप भगवान शिव और श्री विष्णु की शक्तियों के अद्भुत समन्वय को दर्शाते हैं।

उदाहरण के लिए, उन्होंने अहिरावण का वध करने और श्री राम व लक्ष्मण की रक्षा के लिए उग्र पंचमुखी (पाँच मुखों वाले) रूप धारण किया। पंचमुखी हनुमान के स्वरूप में गरुड़ (श्री विष्णु के वाहन), नरसिंह, वराह और हयग्रीव के मुख दर्शाए जाते हैं, जबकि पाँचवाँ मुख स्वयं भगवान हनुमान का होता है, जिन्हें 11वाँ रुद्र माना जाता है। द्वादशाक्षरी मंत्र का भगवान शिव से गहन संबंध है।

हनुमान द्वादशाक्षर मंत्र की दीक्षा सर्वप्रथम किसे दी गई थी?

शक्तिशाली हनुमान द्वादशाक्षरी मंत्र सर्वप्रथम भगवान शिव ने श्रीकृष्ण को प्रदान किया था। प्राचीन काल में भगवान श्रीकृष्ण ने ही पांडव राजकुमार अर्जुन को इस मंत्र का रहस्य बताया और उन्हें दीक्षित किया।

अर्जुन ने इस मंत्र की साधना करके न केवल श्री हनुमान को प्रसन्न किया, बल्कि उनकी कृपा से त्रैलोक्य-विजयी का पद भी प्राप्त किया। इसी मंत्र के प्रभाव से श्री हनुमान महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ की ध्वजा पर सदैव विराजमान रहे। हनुमान जी के संरक्षण में रहते हुए ही अर्जुन ने उस महायुद्ध में विजय प्राप्त की। यही इस मंत्र की महिमा है।

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हनुमान द्वादशाक्षर मंत्र साधना के लाभ

श्री हनुमान, जो भगवान रुद्र के अंशावतार हैं और अत्यंत उन्नत प्राण ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान शिव का रुद्र स्वरूप संहारक और अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। अतः यह मंत्र हनुमान जी की उसी संहारक और शक्तिशाली ऊर्जा का आवाहन करता है, जो शत्रु-नाश और संकट निवारण के लिए उपयुक्त है। इस मंत्र का शुद्ध हृदय से जप करने पर साधक के सभी प्रयासों में निर्भयता, आत्मविश्वास और सफलता की प्राप्ति होती है। इस मंत्र के साथ हनुमान साधना करने के अनेक लाभ हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं।

  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
  • बाधाओं का नाश
  • शक्ति और साहस में वृद्धि
  • एकाग्रता और ध्यान में सुधार
  • भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता में वृद्धि

शास्त्रानुसार, यदि साधक विधि-सम्मत, पूर्ण श्रद्धा और निष्काम भाव से उनके इस मंत्र का जप करता है, तो वह श्री हनुमान के दिव्य दर्शन प्राप्त कर सकता है।

सामान्य प्रश्न

1. क्या हनुमान जी अजर-अमर (चिंरजीवी) क्यों कहते हैं?

बाल्यावस्था में, जब इंद्र के प्रहार से श्री हनुमान मूर्छित हुए, तब वायुदेव ने गति रोक दी, जिससे समस्त जीवों को कष्ट हुआ। तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने उन्हें शांत किया।देवताओं ने हनुमान जी को अनेक वरदान दिए। भगवान शिव ने उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया। 

इसके अतिरिक्त, जब लंका में अशोक वाटिका में हनुमान जी ने माता सीता को प्रभु राम की मुद्रिका (अंगूठी) दी और उनके दर्शन किए, तब माता सीता उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें "अजर अमर गुणनिधि सुत होऊ", अर्थात् तुम अजर-अमर होओ, का आशीर्वाद दिया था।

2. हनुमान जी को बजरंग बली क्यों कहा जाता है ?

‘बजरंग’ शब्द संस्कृत के ‘वज्रांग’ शब्द का अपभ्रंश है। ‘वज्र’ का अर्थ इंद्रदेव के दिव्य अस्त्र के समान कठोर होता है।  इस प्रकार ‘बजरंग बली’ का अर्थ है— जिनका शरीर वज्र के समान कठोर है; इसी कारण उन्हें बजरंग बली कहा जाता है। यह नाम भगवान हनुमान की अपार शारीरिक शक्ति को दर्शाता है। यही कारण है कि उन्हें एक रक्षक के रूप में माना जाता है और पूरे भारत में उन्हें पहलवानों द्वारा विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।


संदर्भ

Vanamali (2010). Hanuman: The Devotion and Power of the Monkey God. Inner Traditions 

Nagar Shantilal (2006) Hanuman Through the Ages. B.R. Publishing Corporation.

*इस ब्लॉग में प्रयोग किए गए सभी चित्र एआई द्वारा निर्मित हैं।*

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Comments (1)

Chandra kant pandey June 19, 2026

Bhut sundar Om swamiji … My wish is to meet u…but I leave in varanasi and i m working in court and sadhnas at Badrika Ashram for at least 21 days.
So I do sadhna through sadhna App,..I done Rudra sadhna online with u..that was my first sadhna..divine feeling..
And from that day I jap “Om namo bhagwate rudraya” I am doing right jap or not tell me through mail..I m waiting for ur answer…pls pls pls…
One time I want to meet u pls take me as a child…Om swamiji..🙏 so greatful..🙏

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