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Thirteen Months In The Himalayas: Chronicles of a Monks Sadhana (Hindi)

Thirteen Months In The Himalayas: Chronicles of a Monks Sadhana (Hindi)

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Description

हिमालय में तेरह मास- एक भिक्षु का साधना-वृतांत

परमात्मा से एकाकार होना ही परम आनंद की अनुभूति है। किंतु क्या इस दिव्य आनंद की प्राप्ति सहजता से हो सकती है? नहीं। यदि आपके मन में परमात्मा के दर्शन की चाह है, तो निश्चित ही इस मार्ग में अनेक बाधाएँ होंगी; लेकिन जो प्राप्त होगा, उस आनंद को शब्दों की सीमा में बाँध पाना संभव नहीं है।

जब हम ईश्वर-प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो वे स्वयं हमारा मार्गदर्शन करते हैं और प्रकृति हमें संकेत देती है। ऐसा ही एक संकेत, बद्रीनाथ से कुछ किलोमीटर दूर स्थित एक पर्वत पर साधिका भैरवी माँ ने ओम स्वामी जी को दिया था। जब स्वामी जी ने माँ भैरवी से यह प्रश्न किया कि क्या उन्हें वास्तव में देवी माँ के पूर्ण दर्शन होंगे, तो उनका उत्तर था—‘यदि तुम्हें नहीं होंगे, तो किसे होंगे?’

अपने हृदय में देवी माँ के दर्शन की गहन इच्छा के साथ ओम स्वामी जी ने हिमालय की अपनी यात्रा आरंभ की। अपनी तेरह माह की गहन साधना में उन्होंने अनेक विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए आत्म-साक्षात्कार की अवस्था को प्राप्त किया। उनके समक्ष भीषण ठंड एक असहनीय चुनौती थी। जंगली जानवरों से सुरक्षा का भय, घंटों साधना में बैठने का संघर्ष, शारीरिक पीड़ाएँ—इन सभी परिस्थितियों ने स्वामी जी की कठिन परीक्षा ली। लेकिन कोई भी उनके देवी माँ के साक्षात्कार के संकल्प को डिगा नहीं पाया, और अंततः उन्हें उस अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई।

जीवन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जिन्हें शब्दों की माला में पिरोया नहीं जा सकता। स्वामी जी को अपनी तेरह मास की यात्रा को पुस्तक का रूप देने में लगभग सात वर्ष का समय लगा। पुस्तक के आठवें अध्याय “तूफान से पहले की शांति” को लिखने में उन्हें विशेष रूप से बहुत संघर्ष करना पड़ा। जब भी वे अपने अनुभवों को लिखने का प्रयास करते, उनका अस्तित्व पुनः उस दिव्य मिलन की साक्षात् अनुभूति करने लगता। यह पुस्तक कोई साधारण पुस्तक नहीं है; इसमें एक गंभीर साधक के सभी प्रश्नों के उत्तर समाहित हैं।

  • पुस्तक ‘हिमालय में तेरह मास—एक भिक्षु का साधना-वृतांत’ में स्वामी जी की हिमालय यात्रा का जीवंत और भाव-विभोर कर देने वाला वर्णन मिलता है। इस अवधि में स्वामी जी ने विष्णु साधना तथा देवी माँ की साधना की थी।
  • पुस्तक की भाषा सरल, प्रवाही और आधुनिक हिंदी में है, जिससे आध्यात्म जैसे जटिल विषय को भी पाठक सहजता  आत्मसात कर सकता है।
  • इस पुस्तक में स्वामी जी की कठिन और तपस्वी दिनचर्या का अत्यंत मार्मिक वर्णन मिलता है। उनका दिन प्रातः साढ़े तीन बजे (ब्रह्ममुहूर्त) में आरंभ होता था। वे प्रतिदिन आठ-आठ घंटे की साधना करते थे और केवल तीन घंटे का ही विश्राम करते थे।
  • एक गंभीर साधक के लिए यह पुस्तक एक सच्चे मार्गदर्शक की तरह है, क्योंकि इसमें बताया गया है कि साधना के मार्ग में एक साधक को किन-किन कठिनाइयों और द्वंद्वों का सामना करना पड़ता है। साधना-पथ पर उसे केवल मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक और भौगोलिक चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है। कड़ाके की ठंड में कई बार स्वामी जी के लिए कुछ कदम चल पाना भी कठिन हो जाता था, लेकिन अपने आराध्य से मिलन की चाह ने उन्हें निरंतर साधना के लिए प्रेरित किया।
  •  इस पुस्तक के अध्य्यन से यह स्पष्टता मिलती है कि आध्यात्मिक अनुभव अचानक घटित नहीं होते, इसके लिए गंभीर तैयारी और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है। 
  • स्वामी जी की इस पुस्तक का मूल संदेश यह है कि बाह्य आडंबरों को त्यागकर हमें अनुशासन, भक्ति, समर्पण और आत्मबल के साथ ईश्वर-साक्षात्कार के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए। हमारा समर्पण जितना गहरा होगा, हमारे अनुभव और परिणाम उतने ही प्रभावी होंगे।

‘हिमालय में तेरह मास’ ऐसी पुस्तक है जिसे अवश्य पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह केवल एक साधना-वृतांत नहीं, बल्कि मानव-मन की सीमाओं, संघर्षों और परात्मा से साक्षात्कार की अत्यंत मार्मिक कथा है। सरल भाषा और सहज शैली इसे हर उम्र के पाठकों के लिए समझने योग्य बनाती है। यह पुस्तक बताती है कि अनुशासन, समर्पण और आत्मबल के माध्यम से मनुष्य भौतिक एवं आध्यात्मिक जीवन में प्रगति कर सकता है। यह पाठक को कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य की ओर अडिग रहने का साहस प्रदान करती है। अंततः, यह पुस्तक अपनी आंतरिक क्षमताओं को जागृत करने का एक प्रेरक माध्यम बन जाती है।

 

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FAQ'S

What is "Thirteen Months In The Himalayas" about?

This book chronicles the extraordinary journey of Om Swami, a young monk who retreated to the Himalayas for thirteen months to engage in intense meditation and self-realization. It provides an intimate look into his struggles and triumphs during this transformative spiritual practice.

Who is the author of this book?

The author is Om Swami, a Himalayan ascetic and bestselling author known for his deep insights into spirituality and sadhana practices. His personal experiences and reflections form the core of this book.

What was Om Swami’s motivation for retreating to the Himalayas?

Om Swami retreated to the Himalayas after renouncing a multimillion-dollar business empire, seeking the finest reward of self-realization and deeper spiritual insight, driven by the words of Bhairavi Ma, “If you won’t get Her vision, who will?”

Is this book a sequel to any of Om Swami’s previous works?

Yes, "Thirteen Months in the Himalayas" is a sequel to Om Swami’s bestselling book If Truth Be Told. This book takes the reader deeper into Om Swami’s spiritual journey, offering more profound insights into his monkhood and quest for the Divine.

Will this book help me on my spiritual journey?

Yes, this book offers rare and powerful insights into the path of self-realization, providing guidance on overcoming doubts, fears, and challenges in your own spiritual practice.

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