गायत्री मंत्र का रहस्य…वेदमाता गायत्री को सिद्ध कैसे करें
गायत्र्येव परो विष्णुर्गायत्रेव परः शिवः
गायत्र्येव परो ब्रह्मा गायत्र्येव त्रयी ततः
(स्कंद पुराण)
माँ गायत्री ही परमात्मा विष्णु है, माँ गायत्री ही परमात्मा शिव है और माँ गायत्री ही परम ब्रह्म है। अत: माँ गायत्री से ही तीनों वेदों की उत्पत्ति हुई है।
वेदों और पुराणों में गायत्री मंत्र को महामंत्र कहा गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस अद्भुत और शक्तिशाली मंत्र के ऋषि कोई ब्राह्मण नहीं, बल्कि एक क्षत्रिय राजा ’राजा कौशिक’ थे? गहन ध्यान की अवस्था में उन्होंने इस मंत्र का साक्षात्कार किया और संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए इसे संसार के समक्ष प्रकट किया; तभी, वे विश्वामित्र कहलाए।
गायत्री मंत्र हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग है, लेकिन बहुत कम लोग इसकी उत्पत्ति और जीवन पर पड़ने वाले इसके प्रभावों के विषय में जानते हैं। वर्षों से ऋषि मुनियों एवं गृहस्थों ने अपने भौतिक एवं आध्यात्मिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस मंत्र की विशिष्ट ऊर्जा का उपयोग किया है।
गायत्री मंत्र में अनेक रहस्य समाहित हैं। यदि आप गायत्री मंत्र और गायत्री मंत्र साधना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो ओम स्वामी जी की पुस्तक ‘गायत्री मंत्र का रहस्य’ आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
गायत्री मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद के तृतीय मंडल, 62वें सूक्त, 10वें मंत्र में किया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं— “गायत्री छन्दसाम् अहम्”, अर्थात् वेदों में मैं ही गायत्री हूँ। गायत्री मंत्र न केवल वैदिक ज्ञान का मूल है, बल्कि यह मनुष्य के जीवन में समग्र विकास और साधना के मार्गदर्शन का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
दैनिक साधना के माध्यम से इस मंत्र का अभ्यास करने से व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त कर परम चेतना की अवस्था तक पहुँच सकता है। यह मंत्र साधक को अपने उद्देश्यों की सिद्धि में भी सहायक है।
ओम स्वामी जी की पुस्तक ‘गायत्री मंत्र का रहस्य’ इस मंत्र की शक्ति को सरल और प्रभावी ढंग से अनुभव करने का सही मार्ग बताती है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताएँ :
- गायत्री मंत्र की उत्पत्ति, ध्वनि की चार अवस्थाएँ तथा मंत्र साधना के तीन स्वरूप जैसे जटिल विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से विस्तारपूर्वक समझाया गया है।
- गायत्री मंत्र साधना करने की विधि को क्रमबद्ध और विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
- यह साधना कब प्रारंभ की जा सकती है, इसे कौन कर सकता है, तथा साधक की दिनचर्या और आहार कैसा होना चाहिए—इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गई है।
- इसमें माँ गायत्री की साधना की वृहद् विधि (36 चरणों) एवं संक्षिप्त आवाहन (सात मुख्य चरणों) के बारे में बताया गया है।
- पुस्तक की भाषा और शैली सरल और रोचक है।
किसी भी साधना को आरंभ करने से पूर्व वेदमाता गायत्री का आवाहन किया जाता है। यह पुस्तक उन सभी साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जो माँ गायत्री की उपासना में गहरी रुचि रखते हैं या साधना के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
अतः, ‘गायत्री मंत्र का रहस्य’ न केवल इस शक्तिशाली मंत्र की महिमा बताती है, बल्कि इसे जीवन में अनुभव करने और आत्मसात करने का मार्ग भी दिखाती है। यह एक ऐसा खजाना है, जो हर पाठक को अपने भीतर की शक्ति और आध्यात्मिक संभावनाओं से अवगत कराता है।